प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम क्या है ? विस्तार से समझाइये ।

 

                     प्रथम विश्व युद्ध


    यूरोप में सन 1914 ई. को युद्ध  बड़ाने भीषण हुआ । इसके पूर्व वीरों के विभिन्न राज्यों में अनेक युद्ध हुए , किंतु इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के मध्य जो युद्ध हुए हुए विश्व के विभिन्न स्थानों पर विभिन्न समय पर हुए , यह युद्ध सन 1914 ई. से सन 1918 ई. तक चलता रहा । लाखों व्यक्ति इस युद्ध में हताहत हुए और इस युद्ध का प्रभाव समस्त संसार पर किसी ना किसी रूप में अवश्य पडा । 






              प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम



प्रथम विश्वयुद्ध से पहले आने की दवे किंतु , यह युद्ध अभूतपूर्व था और इसके व्यापक परिणाम हुए । लगभग सभी क्षेत्र इतने प्रभावित हुए ।

 

 1) युद्ध का व्यापक होना.....

इसके पूर्व के युद्ध इतने व्यापक नहीं थे । यह युद्ध यूरोप और एशिया दोनों ही महाद्वीपों में हुआ। इस युद्ध में 30 राज्यों ने भाग लिया । संसार के केवल 14 देश ही इससे अलग रहे । इस युद्ध के बाद समस्त यूरोप में महामारी का प्रकोप हुआ।

  

2) राजनीतिक परिणाम...

इस युद्ध के बाद एक तंत्र शासन समाप्त हो गया और गणतंत्र या जनतंत्र में इसका स्थान ग्रहण किया । इंग्लैंड , स्पेन , ग्रीस आदि देशों में यद्यपि राजतंत्र बन रहा , किंतु वहां भी जनतंत्र का विकास तीव्रता के साथ होना शुरू हुआ । एशिया में भी साम्राज्यवाद के विरुद्ध विद्रोह की आग धधक उठी और विवश होकर शासकों को जनता की मांग माननी पड़ी । 

 

3)धन की हानि....

इस युद्ध मे धन की अत्यधिक हानि होने के कारण यूरोप को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा । जिन देशों पर शत्रु का अधिकार रहा उनका तो सर्वनाश ही हो गया । आर्थिक संकट टालने के लिए जनता पर नवीन पर लगाए गए और जनता की कठिनाइयां बढ़ गई । 

4)राष्ट्रीयता का विकास...

इस युद्ध के बाद राष्ट्रीयता का पूर्व विकास होना शुरू हुआ । जहां इसी आधार पर पेरिस शांति सम्मेलन में 'आत्म निर्णय ' के सिद्धांत को मानकर  7 नवीन राज्यों की स्थापना की गई , किंतु यूरोप के समस्त राष्ट्रों का निर्माण इसी आधार पर नहीं हुआ जिन राष्ट्रों में राष्ट्रीयता की उपेक्षा की गई वहां की जनता असंतुष्ट रही और उसमें विद्रोह की भावना बलवती होती ही रही ।

5) अधिनायकतन्त्र का स्थापित होना ...

युद्ध द्वारा उपस्थित हुई भीषण समस्याएं जनतांत्रिक सरकार द्वारा नाक सुलझाए जा सकी । फलत: स्वेच्छाचारी साशको की स्थापना हुई , किंतु जनता उनकी निरंकुशता को सहन ना कर सकी और जनतंत्र का अंत हुआ। अधिनायकतन्त्र ने इसका स्थान ग्रहण किया।

   

6) सैनिक शक्ति में बढ़ोतरी ...

यद्यपि पेरिस के शांति सम्मेलन ने जर्मनी की सैन्य शक्ति को नियंत्रित कर दिया , किंतु विजयी राष्ट्रों ने अपनी सैनिक शक्ति में निरंतर विकास किया । जर्मनी में नाजीवाद और इटली में फासीवाद के उदय के बाद उन्होंने हर संभव तरीके से अपनी सैनिक शक्ति में वृद्धि करने का प्रयत्न किया । रूस की साम्यवादी सरकार ने भी ऐसा किया । कई बार सैनिक शक्ति को नियंत्रित करने के प्रयत्न किए गए , किंतु व्यर्थ ।


  7) राष्ट्र संघ का निर्माण ......

प्रथम विश्वयुद्ध के उपरांत शांति स्थापना के उद्देश्य को सामने रखकर राष्ट्र संघ निर्मित किया गया । यह शांति स्थापना की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम था , किंतु राष्ट्रों के स्वार्थों के कारण यह सफल ना हो सका । 





Post a Comment

Previous Post Next Post